बुद्ध (गौतम) के जीवन में कई घटनाएँ घटी !
आत्म ज्ञान प्राप्त करने के बाद एक दिन जब वे नदी के किनारे टहल रहे थे, और फिर वे जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गए !
अपने काम मे माहिर एक महान ज्योतिष नदी पर आए और किनारे पर पैरों के निशान देखे, पैरों के निशान से ही उन्होंने यह पता लगा लिया की ऐसे पैर तो किसी महान सम्राट के ही हो सकते हैं, पर फिर उसे हैरानी हुई की ऐसे जंगल के पास सुनसान जगह पर किसी सम्राट के नंगे पैर कैसे हो सकते हैं !
फिर पैरों के निशान का पीछा
करते हुए गया तो उसने देखा एक भिक्षुक पेड़ के नीचे बैठा हैं, उसे लगा या तो मेरा
ज्योतिष पूरा गलत हो गया हैं? या मैं मूर्ख बन रहा हूँ?
तब उसने बुद्ध ( गौतम ) से पूछा आप कोन हैं?
बुद्ध ने कहा – मैं कोई नहीं हूँ, मैं कुछ नहीं हूँ !
तब ज्योतिष
ने कहाँ - लेकिन तुम्हारे पैर तो
सम्राट जैसे हैं, आपको तो दुनियाँ जितनी चाहिए ?
गौतम बोले - मैं ये करूंगा पर युद्ध से नहीं, और मैं दुनिया का सम्राट
ही हूँ !
तब ज्योतिष
ने कहा - आप एक भिक्षुक हैं ! आपके पास कुछ नहीं हैं !
बुद्ध ने कहाँ - मेरे पास कुछ नहीं हैं, मैं कुछ नहीं हूँ ! इसलिए हर चीज
मेरी हैं !
ज्योतिष ने
कहा - पर आप तो भिक्षुक हैं !
बुद्धह ने कहा - आप आइए आपको
समझता हूँ ! आप जीवन की भविष्यवाणी करने मे व्यस्त हैं, क्योंकि आप अपनी योजनाओ को
अमल करने मैं नाकाबिल हैं ! तभी आप भविष्यवाणियों पर निर्भर हैं ! अगर आप अपनी
योजनाओ पर अमल करेंगे, तो आपको भविष्यवाणियों पर निर्भर रहने की कोई आवश्यकता नहीं
हैं ?
बुद्ध ने आगे कहा - आप भविष्यवाणी करने में व्यस्त हैं, और मैं यहाँ हूँ !
आइए मेरी योजना का हिस्सा बनिए हम कुछ अलग ही करके दिखाएंगे हम धरती पर ही स्वर्ग
बनाएंगे !
सवाल यह हैं की - संभावना
और वास्तविकता के बीच एक दूरी होती हैं, क्या हममें उस दूरी को पार करने का साहस
और प्रतिबद्धता हैं?
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satya vachna
ReplyDeleteDhanyawad aapka isi tarah pyar banaye rakhe
DeleteSatya hai
ReplyDeleteBane rahe
DeleteUttam satya hai
ReplyDeleteJi bilkul
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